"I believe there is no profession in the world that is more important to society than that of a teacher"

डॉ. मधुगुप्ता प्रमुख शिक्षाविद तथा हिन्दी की प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं।राष्ट्रीय कार्यशालाओं, संगोष्ठियों, दूरदर्शन के विभिन्न चैनल और ऑल इंडिया रेडियो पर वार्ताकार के रूप में आपकी विशिष्ट पहचान बना चुकी हैं। आप काव्य गोष्ठियों में बड़े चाव से सुनी जाती हैं। इनकी कविताएँ एवं लेख नियमित रूप से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। पिछले चार वर्षों से आप नियमित रूप से प्रेरणास्पद लघु कविताएँ 'खुशमोर्निंग' और 'मधुवंदन' का लेखन कर रही हैं। 1984 में प्रथम प्रयास में राजस्थान राज्य प्रशासनिक सेवा(R.A.S.)के लिए 141वें स्थान पर चयनित होकर, आपने अपनी पहली पसंद शिक्षण को अपने कैरियर के रूप में स्वीकार किया। वर्ष 1995 से आप ECMS द्वारा संचालित प्रतिष्ठित माहेश्वरी शिक्षण संस्थानों में अनवरत रूप से बहुमूल्य सेवाएं दे रही हैं। वर्तमान में आप माहेश्वरी गर्ल्स पी. जी. कॉलेज,प्रताप नगर, जयपुर के हिंदी विभाग में अनुबद्ध प्राध्यापक( Adjunct Professor) के पद पर कार्यरत हैं |

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“Only the very weak-minded refuse to be influenced by literature and poetry.”

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