'माँ' शब्द की उत्पत्ति
"माँ बहुत सीमित है, अपने ही शब्दों में।
लेकिन बहुत विस्तृत है,अपने अर्थों में।।"
शुद्ध बुद्ध ममतामयी माँ की महिमा का पहला ककहरा मुझे तब जाकर समझ आया, जब मैं खुद माँ बनी और अब कहीं जब, वो अब है नहीं, तो बूझ पाई हूँ, उसकी पूरी बारहखड़ी। आज जान पाई हूँ कि माँ का बच्चे से संबंध सिर्फ शरीर का नहीं होता, यह तो सांसों का बंधन है, बच्चा अपनी पहली श्वांस माँ की कोख में ही लेता है, तब से माँ के साथ उसका वह अटूट बंधन जुड़ जाता है, जो मरते दम तक जुड़ा ही रहता है।
आइए, जानते हैं कि 'माँ' शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई।
1.संस्कृत व्याकरण के अनुसार माँ शब्द 'म' से बना है। 'म' से 'मा' और तत्पश्चात यह 'माँ' के रूप में परिवर्तित हो गया।
2.पुराणों के अनुसार माँ का अर्थ लक्ष्मी है। संभवत इसी माँ से,जिसका अर्थ लक्ष्मी से लिया गया है, माँ शब्द बना। लक्ष्मी माँ से ही सृष्टि का पालन होता है, उसी प्रकार माँ भी शिशु का पालन करती है। इस प्रकार माँ को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया।
3.एक अन्य मत यह है कि इस सृष्टि का आरंभ मनु और शतरूपा नामक स्त्री-पुरुष के समागम से हुआ। मनु के नाम पर ही उनकी संतान को मनुज या मानव कहा गया। मनु की संतान को जिसने जन्म दिया, उसे 'माँ' कहा गया। और इस प्रकार 'माँ' शब्द की उत्पत्ति हुई।
4.भारतीय संस्कृति के कुछ ग्रंथों के अनुसार 'माँ' शब्द की उत्पत्ति गोवंश से हुई। गाय का बच्चा बछड़ा जब जन्म लेता है, तो वह सर्वप्रथम अपने रंभानें में जो स्वर निकालता है, वह 'माँ' होता है यानि कि बछड़ा अपनी जन्मदात्री को ही 'माँ' के नाम से पुकारता है। इस प्रकार जन्म देने वाली को 'माँ' कहकर पुकारा जाने लगा।
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