भारत के सामाजिक और राजनीतिक विरासत के अमूल्य रत्न-अंबेडकर*

            *भारत के सामाजिक और राजनीतिक विरासत के अमूल्य रत्न-अंबेडकर* 


डॉ. भीमराव अंबेडकर भारत के सामाजिक और राजनीतिक विरासत के ऐसे अमूल्य रत्न हैं, जिन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे स्वतंत्रता के पश्चात भारत के अखिल राजनैतिक और सामाजिक स्पेक्ट्रम में सर्वाधिक लोकप्रिय एवं सम्मानित व्यक्ति रहे हैं। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जीवन सतत संघर्ष और सफलता का ऐसा मणिकांचन संयोग है, जो आगत और नवागत पीढ़ियों के लिए सदा ही प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। 

डॉ भीमराव ने अपने जीवन में बहुत से कष्ट सहे, लेकिन कभी भी उन्होंने अपनी शिक्षा से समझौता नहीं किया। वे हर दिन लगभग 18 घंटे अध्ययन किया करते थे। शिक्षा के प्रति उनकी रूचि और कड़ी मेहनत का ही परिणाम था कि बड़ौदा के तत्कालीन महाराज ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान कर, लंदन पढ़ने के लिए भेजा। डॉ. अंबेडकर गौतम बुद्ध, संत कबीर और महात्मा ज्योतिबा फुले को अपना गुरु मानते थे और उनके तीन देवता थे- ज्ञान, स्वाभिमान और शील। बाबासाहेब को पुस्तकें पढ़ने का बहुत ही शौक था। उनकी अपनी एक लाइब्रेरी थी, जो दुनिया की सबसे बड़ी व्यक्तिगत लाइब्रेरी मानी जाती थी। इसमें उस समय लगभग 50,000 से अधिक किताबें थीं। आपको एक ऐसी बात बताती हूँ, जिस पर आप गर्व किए बिना रह ही नहीं पाएंगे-

2004 मेंअमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय ने अपनी स्थापना के 200 वर्ष पूरे होने के होने के उपलक्ष्य में एक महाआयोजन किया, जिसमें उन्होंने अपने विद्यालय में अध्ययन कर चुके शीर्ष 100  बुद्धिमान विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें 'Colmbian Ahead Of Their Times'  नामक अवार्ड देने के लिए जो सूची तैयार की, उसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम पहले नंबर पर था। अंबेडकर को 'सबसे अधिक बुद्धिमान विद्यार्थी', यानि 'First Colmbian Ahead Of Their Times'  के रूप में मरणोपरांत सम्मानित किया गया। ऐसे बिरले व्यक्तित्व के धनी जुझारू बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर आइए, संकल्प लें-

"घनी अंधियारी रातों में ही,
बिजलियाँ चमकी हैं।
सर के परे निकला जब पानी 
बदलियां बरसी हैं।
यह सुना और देखभाला
अनुभवजन्य सत्य है।
ख़ुद फूटे और धरती चीरी,
तब बीज से फसलें उपजी है।"

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