संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यावरण दिवस'

                         'संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यावरण दिवस'
                                            ( 5 जून)


वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के प्रति राजनीतिक उत्तरदायित्व और सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी के साथ निभाने और जन जागरूकता के लिए आज से 46 वर्ष पूर्व 5 जून 1974 को पहला 'संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यावरण दिवस' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किया गया।

तब से अब तक विभिन्न स्तरों पर पर्यावरण संरक्षण के प्रयास किए जा रहें हैं, पर उन प्रयासों में कितनी प्रमाणिकता है? यह प्रश्न विचारणीय है।
क्या आप इस बात से इंकार कर सकते हैं, कि हमने जितना खिलवाड़ इस मासूम और निरीह दिखती प्रकृति से किया है, उतना शायद और किसी से नहीं, जबकि हमें प्रकृति के मूक संदेशों और अनुदेशों को जानना और मानना चाहिए था। मानवीय क्रूरता की विभीषिका सहते इस आक्रोशित पर्यावरण ने अब हमको अपने तरीके से उत्तर देना शुरू कर दिया है। कोरोना जैसी महामारियां , उत्तराखंड और चम्बा की आपदाएं,  सुनामी या अमेज़न की आग  इसका ज्वलंत उदाहरण है
इन संकटों के बावज़ूद अपने बौद्धिक दंभ के चलते हम शिक्षित प्रशिक्षित तथाकथित विद्वतजन अपनी कारगुजारियों से बाज़ नहीं आ रहे हैं।

"जंगल हम जीम गए,
वन्य जीव निगल गए,
ओजोन को छेद कर,
सूरज से झुलस गए,
पर बाज़ नही आए।
धरती को बेध कर,
पाताल को पी गए।
तालाब, बाबड़ी, कुएँ,
बेचारे सब तो डूब गए।
कोरोना को रो रहे हैं,
नहीं सुधरे तो पता नहीं,
किस किस को रोएंगे।
प्रकृति ने अतुल्य दिया है,
उसमें से अब भी बहुत बचा है।
संकल्प लें, उसको सहेजेंगे,
अब और नादानियां नहीं करेंगे।"

इसी भावना और आवश्यकता को देखते हुए, 'संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यावरण दिवस- 2021' की थीम 'पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली (Ecosystem Restoration)' रखी गई है। जंगलों को नया जीवन देकर, पेड़-पौधे लगाकर, बारिश के पानी को संचित कर, धरती आसमान और समंदर को सुरक्षित कर, मेरा मतलब है कि प्रकृति को  उसके मूल स्वरूप में संरक्षित कर हम पारिस्थितिकी तंत्र को फिर से रिस्टोर करें और इस शस्य श्यामला अतुलित संसाधनों की प्रसूता प्रकृति को प्रणाम भाव से स्वीकार करें।

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