कागज़ से मुलाकातें

जब कभी दिल घबराने लगे,

अंदर ही अंदर डर सताने लगे,

बात तो बहुत कुछ हो, 

पर बताना मंजूर न करे।

बताए किसे, यह भी पता न चले,

समझ न आए, ये मन क्या करे,

तब शांत हो, आँखें बंद करो।

और गहरी गहरी श्वांसें भरो।

खुद की खुद से खुल कर बातें करो।

या कलम उठा कागज़ से मुलाकातें करो।

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