मैथिलीशरण गुप्त एवं व्याख्या

मैथिलीशरण गुप्त

साहित्य जगत में दद्दा के नाम से प्रसिद्ध राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को महात्मा गांधी ने राष्ट्र कवि की संज्ञा दी। उन्हें राष्ट्रकवि इसलिए नहीं कहा गया कि उन्होंने राष्ट्रीय चेतना से भरपूर कविताएं लिखी उन्हें राष्ट्रकवि  इसलिए कहा जाता है कि उनकी भाषा उनका साहित्य हमारी चेतना, हमारी बोलचाल और हमारे स्वतन्त्रता आंदोलन की भाषा बन गई।  वे हिंदी खड़ी बोली को प्राणदान देने वाले प्रथम महान साहित्यकार माने जाते हैं।उन्हें पौराणिक विषय और चरित्र बेहद प्रिय थे। उनके जीवन से संदेश और प्रेरणा देते हुए, उन्होंने अपने काव्य की रचना की। उन्होंने भारतीय संस्कृति की उपेक्षिता नारी के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए, उन्हें एक गरिमा पूर्ण व्यक्तित्व प्रदान किया। उन्होंने अपने काव्य में रामायण और महाभारत के चरित्रों को अपने समकालीन समय से जोड़ते  हुए यथार्थ के धरातल भूमि पर उतारा  इनके काव्य में राष्ट्रीयता और गांधीवाद की प्रधानता है। उनकी रचनाओं में पारंपरिक भारतीय मूल्यों के साथ आधुनिकता का स्वर सुनाई देता है।  भारत की महान संस्कृति और गौरवमय इतिहास का महत्त्व है।भारत के इतिहास की महान नारियों का अपने काव्य में चित्रण किया।मानवता वाद और समाज के उत्थान के लिए समर्पित उनके काव्य में समन्वित शिल्प का सौंदर्य देखने को मिलता है। गुप्त जी की  ने भाषा की सामाजिकता का मनोरम प्रयोग किया है मुहावरों के प्रयोग से उनकी भाषा के अर्थ में गंभीरता बढ़ी है।भाव के अनुकूल भाषा प्रयोग की क्षमता उनके काव्य को सरस बनाते हैं। उन्होंने प्रबंध मुक्तक काव्य शैली को अपनाया ।उनकी रचनाओं में भक्त कवियों की तरह अतुल निवेदन है तो रीतिकालीन कवियों की तरह सौंदर्य विधान है। गुप्तजी ने अपनी कविताओं में अलंकार विधान का भी पूरा ध्यान रखा उन्होंने उपमा रूपक अनुप्रास अलंकार ओं का सौंदर्य दर्शनीय है उनकी छंदों की गति गति के साथ भाषा की अभिव्यक्ति में वक्रता उत्पन्न हुई है। कुछ पद शैली में है तो कुछ एकदम नवीन शैली में है उपमा दृष्टांत अलंकारों का प्रयोग,समासोक्ति ,  श्रृंगार रस के विपक्ष की उत्कृष्टता उनके काव्य की प्रमुख विशेषता है

व्याख्या लेखन

संकेत सूत्र--….............. -।

संदर्भ-
प्रस्तुत काव्यांश  राष्ट्रकवि 'मैथिली शरण गुप्त' द्वारा रचित प्रसिद्ध 'साकेत' खंडकाव्य के नवें सर्ग से अवतरित है।

प्रसंग-
विरहणी उर्मिला के प्रिय स्मरण और उन्मादित स्तिथि का करुणा जनक वर्णन कर, उसके व्यथित भावों को विभिन्न उदाहरणों द्वारा प्रस्तुत किया है।
भावार्थ-
...   

काव्य-सौष्ठव-
भावगत- विशेषताएँ-
1.मूल भाव
2.विषय वस्तु
3.रस निष्पत्ति व काव्य गुण
4.कल्पना की उत्कृष्टता
5.संदेश एवं प्रेरणा
कलागत- विशेषताएँ-
भाषा एवं शब्दावली
शैली
छंद विधान
अलंकार सौंदर्य

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