व्याख्या लेखन-
संकेत सूत्र-
पद्यांश का पहला शब्द...... पद्यांश का अंतिम शब्द
संदर्भ-
उपयुक्त पद्यांश (पुस्तक का नाम) में संकलित (अध्याय का नाम) से उद्धृत है। इसके रचयिता लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार (लेखक का नाम) हैं।
प्रसंग-
प्रस्तुत पद्यावतरण में कवि ने(मूल विषय) पर प्रकाश डालते हुए, अपने मर्मस्पर्शी एवं मनोहारी भाव अभिव्यक्त किए हैं।
भावार्थ-
(कवि का नाम) आशय है कि............... कवि ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि ......….................
काव्य- सौंदर्य-
भावगत विशेषताएं-
1. विषय वस्तु-
2. मूल भाव- ........के गहन भावों की अभिव्यंजना हुई है।
3. रस निष्पत्ति-
4. कल्पना की उत्कृष्टता- कविता में कवि की कल्पना की उत्कृष्टता और अर्थ की गंभीरता दोनों का मणिकांचन संयोग देखा जा सकता है
5. संदेश एवं प्रेरणा-
कलागत विशेषताएं-
1. भाषा- काव्यांश की भाषा भाव और विषय के अनुरूप है। भाषा में लाक्षणिकता,व्यंजकता, सामसिकता का गुण समाविष्ट है
2. शैली- अलंकारिता, चित्रात्मकता बिंबत्मकता भावपूर्णता शैली की प्रमुख विशेषताएं हैं।
3. छंद योजना- कविता में यति गति तुकांतता के अनुरूप है तथा लय और पद मैत्री से कविता में गेयता व संगीतात्मकता का गुण उत्पन्न हो गया है।छंद की तुकांत योजना मनोरम एवं भावानुकूल है।
4. अलंकार विधान- कविता अलंकारों की दृष्टि से उच्च कोटि की बन पड़ी है। कविता में अनुप्रास व अन्त्यानुप्रास( अन्य अलंकारों के नाम) अलंकारों की छटा देखते ही बनती है।
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