मेरे देश की देहरी पर बसंत आया है,
मौसम महका है, धूप से मिलकर कलियां चटकी है।
मेरे देश की धरती ने धानी चुनरिया ओढ़ी है,
पीली सेज पर पौढ़ी है, हवाएं झूमकर आंगन में आ ठुमकी है।
मेरे देश की अमरैया में फुलवारी फूली है,
पत्तों पर झूली है, बौराई कोयलिया डाल डाल पर कुहूकी है।
मेरा देश मुस्काया है, जाड़े में जकड़े,
ठंड से अकड़े, हर मुख पर हरियाली छलकी है।
मेरे देश की देहरी पर बसंत छाया है।
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